Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

54. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — नखपादादिलक्षण

नखपादादिलक्षण

स्निग्धोन्नताग्रतनुताम्रनखी कुमार्या: पादौ समोपचितचारुनिगूढगुल्फौ। सामुद्रिकशास्त्रस्य श्लिष्टङ्गुलीकमलकान्तिंतलौ च यस्या- स्तामुद्धहेद्यदि भुवोधिपतित्वमिच्छेत्॥२।। जिस कुमारी के नख चिकने होकर ऊंचे हों व जिनका अग्रभाग पतला हो व तांवे समान वर्ण हो व दोनों पैर समान व कुछेक मोटे होकर मनोरम हों व जिनमें गंठे (टखने छिपे हों व अंगुलियाँ परस्पर मिली हों व तलवे कमल के समान शोभावाले हों तो उ कुमारी को सुलक्षण जानना चाहिये यदि कोई प्राणणी पृथ्वीपति होने की चाहना क तो उस कुमारी को अपने साथ विवाह करै ॥ २ ॥