Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

55. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — मत्स्यादि चिह्नयुतपाद जङ्गादिलक्षण

मत्स्यादि चिह्नयुतपाद जङ्गादिलक्षण

मत्स्यांकुशाव्जयववज्रहलासिचिह्नावस्वेदनौ मृदुतलौ चरणौ प्रशस्तौ जड्चे च रोमरहिते विशिरे सुवृत्ते जानुदयं सममनुल्वणसन्धिदेशम्॥३ ऊरू घनौ करिकरप्रतिमावरोमावश्वत्थपत्रसद्दशं विपुलं च गुह्यम्। श्रोणीललाटमुरुकूर्मसमुन्नतं च गूढो मणिश्र विपुलां श्रियमादधाति॥४। जिसके चरतल में मछली, अंकुश, कमल, यव, वज्र, हल और तलवार के बि हों व जिनमें पसीना न आता हो व तलवे कोमल हों तो उस नारी के वे चरण प्रशस् होते हैं व जङ्ढायें रोमरहित व नसों से विहीन होकर गोलाकार हों व दोनों घुटनू स मान होकर सन्धिदेश में मांसल हों व दोनों ऊरु घने व हाथी के सूंड़ के समान होक रोमों से रहित हों व गुहाङ् पीपलपत्र के समान होकर विस्तीर्ण हो व कमर तथां ले लाट चौंड़े होकर कछुवे के समान ऊंचे हों और मणि छिपी हो तो वह नारी बड़ी संपद को धारती है।। ३।४॥।