58. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — भुललाटलक्षण
भुललाटलक्षण
नो संगते नातिपृथू न लम्बे शस्ते श्रुवौ बालशशाङ्वक्रे। अर्धेन्दुसंस्थानमरोमशं च शस्तं ललाटं न नतं न ुङ्गम् ॥ ६ ॥ स्त्रियों की दोनों भौहैं यदि संलग्न व अतिविस्तृत व बहुत लम्बी न होकर बाल- चन्द्रमा के समान टेढी हों तो मशस्त कहाती हैं व जिका ललाट अरधचन्द्राकार व लोमों से रहित होकर न लचा हो न ऊंचा हो तो प्रशस्त जानना चाहिये।। ६।।