62. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — ऊर्ध्वरेखालक्षण
ऊर्ध्वरेखालक्षण
मध्याङ्गलिं या मणिवन्धनोत्था रेखा गता पाणितलेडङ्नायाः। ऊर्च ऊर्ध्वस्थिता पादतलेथवा या पुंसोथवा राज्यसुखाय सा स्यात् ॥१३। जिसके करतल में मशिवन्धन से उठी जो ऊर्ध्वरेखा मध्यमा के मूल में विद्यमा हो तो वह स्त्री रानी होती है अथवा इसीभांति पादतल में ऊर्ध्वरेखा टिकी हो तो भ पूर्वार्धः। रानी होती है अथवा अपने पुरुप को राज्यसुख के लिये होती है अथवा जिस पुरुष के करतल या पादतल में ऊर्ध्वरेखा उपस्थित हो तो वह पाणी भी राजा होता है॥ १३ ॥