Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

64. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — पादाङ्कुलिलक्षण

पादाङ्कुलिलक्षण

कनिषठिका वा तदनन्तरा वा महीं न यस्याः स्पृशती स्त्रियाः स्यात्। गताथवाङ्गष्ठमतीत्य यस्याः प्रदेशिनी सा कुलटाऽतिपापा॥ १७॥ जिस स्त्री के गमनकाल में पैरकी कनिष्ठा व अनामिका अ्ँगुजी पृथ्वी का स्पर्श न. करती हो अथवा जिस स्त्री के पैरकी तर्जनी अँगुली अँगूठे को उलांघ कर पहूँचगई है। तो वह स्त्री कुलटा (व्यभिचारिणी) होकर पापकारिणो होती है॥ १७ । पिएिडकोदरलक्षमाह- उद्बद्धाम्यां पिषिडकाभ्यां शिराले शुष्के जङ्ढे रोमशे चातिमांसे । सामुद्रिकशास्त्रस्य वामावत निम्नमल्पं च गुह्यं कुम्भाकारं चोदरं दुःखितानाम् ॥ १८॥ जिन स्त्रियों की पेंदुरियाँ ऊँची हो व जङ्गायें लोमोंवाली व अरतिमार्सल या सू होकर नसों से व्याप् हों यानी नसैं झलझलाती हों और जिनका गुह्यदेश वामावर्त हो गहरा व छोटासा प्रतीत हो और जिनका उदर घड़ा सा हो तो वे स्त्रियाँ दुःखभागि होती हैं॥ १८ ॥।