Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

67. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — स्तनकर्णदन्तलक्षण

स्तनकर्णदन्तलक्षण

स्तनौ सरोमौ मलिनोल्वणौ च क्ेशं दधाते विषमौ च कणौं। स्थूला: कराला विषमाश्च दन्ताः क्केशाय चौर्याय च कृष्णमांसाः ॥२२॥ जिनके स्तन (दूध) रोमों समेत व मैले होकर बड़े हों और कान विपम (छोटे, बड़े) हों तो उन स्त्रियो के लिये क्केश को धारते हैं और जिनके दाँत मोटे व कराल होकर विषम हों तो उन स्त्रियों को दुःखदायक होते हैं और जिनके मस्कुरों के मांस काले पड़गये हों तो वे स्तिरियां चोरी करती हैं यानी चोरके कार्य में परायख रहती हैं ॥ २२ ॥ करतले क्रव्यादिरेखाज्ञानमाह- शुष्कैः शिरालै्विषमेश्र हस्तैर्भवन्ति नार्यः सुखवित्तहीनाः ॥२३॥ जिनके हाथों में मांसभक्षी वाज आदि पक्षी, भेड़िया, कौवा, ऊजली चील और घुग्बू इन्हों के समान निशान प्रतीत हों व जिनके हाथ सूखे होकर नसों से व्याप्त हों व जिनके हाथ विषम (छोटे बड़े) हों तो वे स्त्रियां सुखं व धन से रहित रहती हैं । २३॥