69. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — पादतल लक्षण
पादतल लक्षण
स्त्रीणां पादतलं स्निग्धं मांसलं मृदुलं समय्। उपस्वेदमुष्णमरुणं बहुभोगोचितं स्मृतम् ॥१०॥ जिन स्त्रियों के पैरों के तलवे चिकने, मांस से भरे हुए कोमल होकर समान हों जिनमें पसीना न आता हो व गरम होकर लाल हो तो उन स्तियों को बड़ा भो माप्त होता है ॥ १० ॥ रूक्षं विवर्णं परुषं खसिडतप्रतिबिम्बकम्। सूर्पाकारं विशुष्कं च दुःखदौर्भाग्यसूचकम्॥११॥ जिनके पैर के तलवे रूखे, वर्णविहीन होकर कठोर हों व जिनके धरने पर बाढू आादिकों में निशान नहीं हो व सूप के समान होकर विशेपता से सूखे हों तो उन खिरयां को दुःखदायक होकर वुरेभाग्य को बतलाते हैं ॥ १॥