72. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — प्रदेशिन्यादिलक्षण
प्रदेशिन्यादिलक्षण
प्रदेशिनी भवेद्यस्या अङ्गष्ठादतिरेकिणी। कन्यैवाकुलटा तु स्यादेष एव विनिश्चयः ॥२२॥ राजित्वसूचकं स्त्रीणां पादपृष्ठ समुन्नतम्। स्निग्धाः समुन्नतास्ताम्रा वृत्ताः पादनखाः शुभाः॥२३॥ जिसके पैर की तर्जनी अँगुली अँगठे से बड़ी हो तो वह कन्याकी अवस्था में ही या बिना ब्याह किये ही पुंश्रली होजाती है यह विशेषता से ही निर्णय करना चाहिये या स्त्रियों के पैर का पीठ ऊंचा हो तो वह रानी के पदको सूचित करता है और जिसके पै के नख चिकने व ऊंचे तथा ताम्र सरीखे होकर गोलाकार प्रतीत हों तो शुभदायक हो हैं॥ २२। २ ३ ।।