Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

73. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — पादपृष्ठमध्यनम्रादिलक्षण

पादपृष्ठमध्यनम्रादिलक्षण

राजित्वसूचकं स्त्रीणां पादपृष्ठ समुन्नतम्। अरस्वेदमशिराव्यं च मसृणं मृदु मांसलम् ॥।२४॥ दरिद्रा मध्यनग्रेण शिरालेन सदाध्वगा। रोमाढ्येन भवेद्दासी निमांसेन च दुर्भगा ॥ २५॥ पूर्वार्धः। ४ ३ यदि स्त्रियों के पैरका पीठ ऊंचा पसीना से रहित व नसों से बिहीन व चिकना तथा कोमल होकर मांसयुक हो तो वह रानी के पदको सूचित करता है जिसके पैर की पीठ बीचमें लची हो तो वह स्त्री दरिद्रा होती है व जिसके पैर की पीि नसों से व्याप्त हो तो वह स्त्री सदैव मार्ग में गमन करती है व जिसके पैर की पीठ रोमोंवाली हो तो वह स्त्री दासी होती है और जिसके पैर की पीठ मांससे रहित हो तो वह स्त्री दुर्भगा (दुरे भाग- वाली) कहाती है॥ २४ । २५।।