Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

74. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — गुल्फादिलक्षण

गुल्फादिलक्षण

गूढौ गुल्फौ शिवायोक्कावशिरालौ सुवर्तुलौ। स्थपुटौ शिथिलौ दृश्यौ स्यातां दौर्भाग्यसूचकौ॥ २६ ॥ समपार्ष्णिः शुभा नारी पृथुपार्ष्णिश्च दुर्भगा। कुलयोन्नतपार्ष्ण: स्यादीर्धपाष्णिश्च दुःखभाकू॥२७॥ जिनके पैरके गंठे नसों से व्याप्त होकर छिपेहुए गोलाकार प्रतीत हों तो उन स्त्रियों के लिये कल्याणदायक होते हैं व जिनके पैरके गंठे निचले होकर ढीलेसे देखे जाते हों तो वुरेभाग को बतलाते हैं यानी ऐसे गंठोवाली स्त्रियां दुर्भगा कहाती हैं व जिसके पैर की एँड़ी समान प्रतीत हो तो वह स्त्री शुभदायक होती है व जिसकी एँड़ी चौड़ीसी प्रतीत हो तो वह स्त्री दुर्भगा होती है व जिसकी एँड़ी ऊंचीसी प्रतीत हो तो वह स्त्री छिनारि होती है और जिसकी एँड़ी लम्बी प्रतीत हो तो वह स्त्री दुःखभागिनी होती है।।२६/२७।।