Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

76. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — जानुलक्षण

जानुलक्षण

वृत्तं पिशितसंलग्नं जानुयग्मं प्रशस्यते। निर्मांसं स्वैरचारियया दरिद्रायाश्च विश्लथम्॥३०॥ जिसके दोनों जानु (छुटुनू) गोलाकार होकर मांससे भरे हों तो वह स्त्री भली हो है व जिसके घुटुनू मांसरहित हों तो वह स्त्री अपनी चाहना से घमती है और जिस जानु मज़दूत न हों तो वह स्त्री दरिद्रा होती है॥ ३० ॥