Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

88. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — स्तनलक्षण

स्तनलक्षण

धनौ वृत्तौ दृढौ पीनौ समौ शस्तौ पयोधरौ। स्थूलाग्रौ विरलौ शुष्कौ वामूरूणां न शर्मदौ ॥। ५८ ॥ जिनके दोनों स्तन (दूध) कठोर, गोल दृढ़ व स्थूल होकर समानाकार प्रतीत हों तो उन स्त्रियों के लिये शुभदायक होते हैं और जिनके स्तनों के अग्रभाग मोटे हों व विरल होकर सूखे प्रतीत हों तो उन स्त्रियों को सुखदायक नहीं होते हैं।। ५८ ॥ दक्षिपोन्नतवक्षोजा पत्रिणी त्वग्रणीर्मता। वामोन्नतकुचा सूते कन्यां सौभाग्यसुन्दरीम्॥ ५६॥। अरघट्टघटीतुल्यौ कुचौ दौश्शील्यमूचकौ। १ समवक्षा हि भोगाढ्या निक्नवक्षा धनोज्सिता । विस्तीर्रादृदय शोषा पुंअली नि- र्दया तथेति। सामुद्रिकशास्त्रस्य पीवरास्यौ सान्तरालौ पृथूपान्तौ न शोभनौ ॥ ६० ॥ जिसका दहिना स्तन ऊंचा प्तीत हो तो वह स्त्री पुत्रवती होकर श्रेष्ठ मानी जाती और जिसका वायां स्तन ऊंचा प्रतीत हो तो वह सी सौभाग्यसुन्दरी कन्याको उपजा है और जिसके दोनों स्तन रहट के समान पतीत हों तो बुरे स्वभाव को सूचित करते और जिन स्तनों के मुख मोटे हो व फासिले पर होकर उपान्त में चौड़े से पतीत हों वे शुभदायक नहीं होते हैं॥। ५६। ६० ।