Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

93. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — कपोललक्षण

कपोललक्षण

शस्तौ कपोलौ वामाक्ष्याः पीनौ वृत्तौ समुनतौ। रोमशौ परुषौ निम्नौ निर्मासौ परिवर्जयेत॥ ६३ ।। जिसके गाल मोटे व गोल होकर ऊंचे प्रतीत हों तो उस स्त्री के लिये शुभदाप होते हैं और जिसके गाल रोमोवाले, कठोर व निचले होकर मांसरहित प्रतीत हों उस सती को त्याग देवे ।। ६३॥ मुखलक्षएमाह- समं समांसं मुस्निग्यं स्वामोदं वर्तुलं मुखम्। जनेतृवदनच्छायं धन्यानामिह जायते ॥ ६४ ॥ जिनका मुख समान व समांस तथा चिकना व गोल होकर सुगन्धित प्रतीत हो जिसमें पितृमुख की शोभा भासती हो तो वे स्त्रियां इस लोक में धन्यवाद देने योम्य हे हैं यानी ऐसा मुख धन्य स्त्रियों का होता है॥। ६४ ॥