Books / Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press)

96. Sāmudrika Śāstra (Nawal Kishore Press) — दन्तलक्षण

दन्तलक्षण

गोक्षीरसन्निमाः स्निग्धा ात्रिंशददशना: शुभाः। अधस्तादुपरिष्टाच् समास्तोकसमुन्नताः॥६॥ पीताः श्यावाश्र दशना: स्थूला दीर्घा द्विपङ्क्रयः। शुक्कयाकाराश्र विरला दुःखदौर्भाग्यदायकाः ॥६६॥ अधस्तादधिकैर्दन्तैर्मातरं भक्षयेत्स्फुटम्। पतिहीना च विकटैः कुलटा विरलैर्भवेत्॥ १०० ॥ जिनके दांत गोदूध के समान तथा चिकने होकर वत्तीस संख्यावाले हों तथा नीचे व ऊपर समान होकर कुछेक ऊंचेसे प्रतीत हों तो उन ख्त्रियों को शुभदायक होते हैं और जिनके दांत पीले व कपिलवर्णवाले, मोटे, लम्बे, दो पांतिवाले तथा सीपी के आकारवाले ोकर बिरले प्रतीत हों तो उन स्त्रियों के लिये दुःख व दौर्भाग्य को देते हैं और जिसके ांत नीचे तरफ़ अधिक प्रतीत हों तो वह स्त्री माता को विनाशती है व जिसके दांत वि- 7१ कटाकार पतीत हों तो वह स्त्री पति से हीन होती है और जिसके दांत विरले प्रतीत हों ो वह स्तरी पुंश्ली (छिनारि) होती है॥ ६८ | १०० ॥ जिहालक्षएमाह- जिह्वेष्टमिष्टभोक्की स्याच्छोणा मृद्धी तथा सिता। दुःखाय मध्यसंकीर्णा पुरोभागसविस्तरा॥ १॥। १ दन्तस्नेहेन सौभाग्यं लभते नात्र संशयः । केशस्नेहेन सौभाग्यं नेत्रस्नेहेन वस्नता। ववद्धिन च यः स्निग्धः प्राप्ोति विपुलं धनम् ।। सामुद्रिकशास्त्रस्य सितया तोयमरणं श्यामया कलहप्रिया। दरिद्रिणी मांसलया लम्बयाऽभक्ष्यभक्षिणी॥ २ ।। विशालया रसनया प्रमदातिप्रमादभाक। जिसकी जीभ लाल व कोमल होकर कुछेक सफ़ेदीसी लिये गतीत हो तो वह अभिलपित पदार्थों को पाकर मीठे भोजनों को करती है तथा जिसकी जीभ बीच में स होकर अग्रभाग में चौड़ीसी पतीत हो तो उस स्त्री को दुःखदायक होती है और जि जीभ सफ़ेदही प्रतीत हो तो वह स्त्ी जलमें डूवकर मरजाती है व जिसकी जीभ काल पतीत हो तो वह स्त्री बहुतही लड़ाई करती है यानी उसके दिलमें झगड़ा फ़िसा बसारहता है व जिसकी जीभ मांस से लदी हुई मोटीसी पतीत हो तो वह सत्री दरिदि होती है व जिसकी जीभ बहुतही लम्बीसी पतीत हो तो वह खी अभक्ष्य पदाथों खानेवाली होती है और जिसकी जीभ बहुतही चौड़ीसी पतीत हो तो वह स्त्री बड़े मादोंकी यानी भूलोंकी सेवनेवाली होती है । १। २। ३ ॥