18. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — हस्ताङ्लिलक्षण
हस्ताङ्लिलक्षण
हस्ताब्ुलयो दीर्घाश्चिरायुपामवलिताश्च सुभगानाम् । मेधाविनां च सूचमाश्चिपिटा: परकर्मनिरतानाम्॥ ४१॥ जिनके हाथ की अँगुलियाँ बड़ी हों वे दीर्घजीवी होते हैं। जिनकी अँगुलियाँ बलियों से रहित हों वे बड़े भाग्यवाले होते हैं। जिनकी अँगुलियाँ पतली हों वे बुद्धिमान् होते हैं। जिनकी अँगुलियाँ चपटी हों वे दासकर्म करनेवाले होते हैं॥ ४१॥ * (देखिये चित्र नं० ११, १२ और १३) स्थूलाभिर्धनरहिता बहिर्नताभिश्च शस्त्रनिर्याणाः। कपिसदृशकरा धनिनो व्याघ्रोपमपाणयश्च पापाः॥४२॥। जिनके हाथ की अँगुलियाँ मोटी हों वे निर्धन होते हैं। जिनकी अँगु- लियों का अग्रभाग लचा-सा हो वे शस्त्राघात से मृत्यु पाते हैं। जिनके
- पाश्चात्य विद्वानों का मत है कि बड़ी उँगलीवाले भौतिकवादी हाते हैं। हमें इसका अनुभय भी हुआ है।-सं० हाथ वानर के हाथ की तरह हों वे धनी होते हैं। जिनके हाथ बाघ के हाथ के समान हों वे पापी होते हैं॥ ४२ ॥ +