Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

25. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — नुतलक्षण

नुतलक्षण

धनिनां चुतं सकृदद्वित्रिपिरिडतं ह्वादि सानुनादं च। दीर्घायुषां प्रमुक्कं विज्ञेयं संहतं चैव ॥ ६८ ॥ जिनकी छींक एक ही समय दो-तीन हों व पीछे से उनका शब्द सुनने योग्य हो वे धनी होते हैं। जिनकी निकली हुई छींक गम्भीर हो वे बड़ी उमरवाले होते हैं॥। ६८ ॥