32. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — वक्षआदि के लक्षण
वक्षआदि के लक्षण
वक्षोऽथ कक्षानखनासिकास्यं कृकाटिका चेति पडुन्नतानि। इस्वानि चत्वारि च लिङ्गपृष्ठं ग्रीवा च जङ्गे च हितप्रदानि॥६० ।। वक्षःस्थल, कक्षा (बगल), नख, नासिका, मुख और घाँटी ये छः ऊँचे (उठे) हों और लिङ्, पीठ, घींच, जंघा ये चार छोटे हों तो हितकर होते हैं ॥ ६० ॥