33. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — नेत्रान्त और पाद के रक्रादिलक्षण
नेत्रान्त और पाद के रक्रादिलक्षण
नेत्रान्तपादकरताल्वघरौष्ठजिह्वा रक्नानखाश्च खलु सप्त सुखावहानि। सूच्माणि पञ्चदशनांगुलिपर्वकेशाः साकं त्वचा कररुहाश्र न दुःखितानाम्॥ ६१ ॥ नेत्रकोण, पादतल, करतल, तालु, निचला ओष्ठ, जिदा और नख ये सातों लालवर्ण सृखदायक होते हैं। दाँत, अँगुलियों के पर्व, केश, खाल और नख ये पाँच छोटे दुखदायी होते हैं ।। ६?॥