34. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — हनु आदि के दीर्घलक्षण
हनु आदि के दीर्घलक्षण
हनुलोचनबाहुनासिकाः स्तनयोरन्तरमत्र पञ्चमम्। इति दीर्घमिदन्तु पञ्चकं न भवत्येव नृणामभूभृताम् ॥ ६२॥ जिनकी टुड्डी, लोचन, बाडु, नासिका और स्तनों का अन्तर ये पाँच स्थान दीर्घ हों वे राजा होने हैं। राजाओं के सिवा किसी के उक्क पश्च स्थान दीर्घ नहीं होते ।। ६२ ।।