Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

35. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — छायालक्षण

छायालक्षण

छाया शुभाशुभफलानि निवेदयन्ती लच््या मनुष्यपशुपत्तिपु लक्षणजञैः । तेजोगुणान्वहिरपि प्रविकाशयन्ती दीपप्रभा स्फटिकरत्नघटस्थितैव॥ ६३ ।। छाया (कान्ति) या शरीर की शोभा शुभाशुभ फलों को बताती है। इसलिए लक्षखज्ञाता विद्वानों को मनुष्य, पशु व पत्तियों में उसको देखना चाहिये। स्फटिक रन्न के बने घड़े में टिकी हुई दीपक की प्रभा की नाई कांति भी तेज तथा गुखों की द्योतक है।। ६३ ॥। *