Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

39. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — छायादेवतालक्तण

छायादेवतालक्तण

छांयाः क्रमेण कुजलाग्न्यनिलाम्बरोत्थाः केचिद्दन्ति दश ताश्च यथानुपूर्व्वाः। तुल्यास्तु लक्षणफलैरिति तत्समानाः ॥ ६८ ॥ पृथ्वी', जल, अग्नि, वायु, आकाश इन त्च्वों से उपजी हुई क्रम से पाँच छाया हैं। उनको अनेक आचार्यों ने यथानुपूर्वी दश कहा है। सूर्य, विष्णु, इन्द्र, यमराज और चन्द्रमा ये ५ पूर्वोक छायाओं के ५ देवता हैं। उन्हीं के तुल्य छाया हैं। लक्षण व फलों से माणी उन्हींके समान होते हैं। यानी जिस प्राखी में जिस तच्व की छाया के लक्षण व फल घटित हों उन्हीं के समान माखियों को लक्ष व फल बतलाना चाहिये।। ह८ ।।