4. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — जानुलक्षण
जानुलक्षण
निर्मांसजानुर्प्रियते प्रवासे सौभाग्यमल्पैः प्रथितैर्दरिद्राः। स्त्रीनिर्जिताश्चापिभवन्तिनिम्नैराज्यंसमांसैश्च महद्विरायुः११ जिसके बुटनू मांसरहित हों वह परदेश में मरता है। जिसके बुट्नू थोड़े मांसवाले हों वह भाग्यशाली होता है। जिनके बुटुनू चौड़े हों वे दरिद्री होते हैं। जिनके बुटुनु गहरे हों वे स्त्री के वश में रहते हैं। जिनके घुटनू मांसज़ हों वे राज्य पाने हैं। और भारी बुटुनू दीर्घायु के द्योतक हैं ।। ११।।