Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

5. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — लिङ्गलक्षण

लिङ्गलक्षण

लिङ्गेडल्पे धनवानपत्यरहितः स्थूले विहीनो धनै- मेंढे वामनते सुतार्थरहितो वक्रेऽन्यथा पुत्रवान्। दारिद्रचं विनते त्वधोऽल्पतनयो लिङ्ने शिरासन्तते स्थूलग्रन्थियुते सुखी मृदु करोत्यन्तं प्रमेहादिभिः ॥१२॥ जिसका लिङ्ग छोटा हो वह धनी होता है। जिसका लिङ्ग मोटा हो वह सन्तानरहित होता है। जिसका लिङ्ग वायीं तरफ़ झुका हो वह पुरुप दरिद्री होता है। जिसका लिङ्ग टेहा हो वह सन्तान और धनरहित होता है। जिसका लिङ्ग सीधा हो वह पुत्रवान् होता है। जिसका लिङ्ग नीचे की तरफ़ लचा हो वह दरिद्री होता है। जिसका लिङ्ग नसों से घिरा हो वह थोड़ी सन्तानोंवाला होता है। जिसका लिङ्ग मोटी गाँठोंवाला हो वह सुखी रहता है। जिसका लिङ्ग ढीला हो तो प्रमेह, पथरी आदि घोर रोगों से उस प्राणी की मृत्यु होती है ॥ १२. ॥