42. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — रक्नसारलक्तण
रक्नसारलक्तण
रक्लैस्तु रक्सारा बहुसुखवनितार्थपुत्रयुक्काः॥१॥ जिनके तालु, ओठ, दाँत, कर्णरन्धू, जिहा, नेत्रपान्त, गुदा, हाथ और पैर ये लालवर्ण हों तो उन में रक्राधिक्य जानना चाहिये। वे भाखी बहुसुखशाली, खरीसमन्वित तथा धनी और पुत्रवान् होते हैं ॥ ?॥