45. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — संघातलक्षण
संघातलक्षण
उपचितदेहो विद्वान् धनी सुरूपश्च मांससारो यः। संघात इति च सुश्लिष्टसन्धिता सुखभुजो ज्ञेयाः ॥४ ॥ जिसकी देद भलीभाँति पुष्ट हो उसमें मांस का सार जानना चाहिये। वह विद्वान्, धनवान् और रूपवान होता है। जिनकी देह में समस्त सन्धियाँ पुष्ट हों उन्हें सुखभोगी जानना चाहिये॥ ४ ॥