Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

48. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — मुखस्वमावलक्षण

मुखस्वमावलक्षण

साध्यमनूकं वक्राद्गोवृषशार्दूलसिंहगरुडमुखाः। अप्रतिहतप्रतापा जितरिपवो मानवेन्द्राश्च ।।७॥ है। संपादक।

  • सामुद्रक शास्त्र आयुर्वेद से घनिष्ठ संबंध रखता है। प्रमाए यही श्लोक मुख से स्वभाव जानना चाहिये। जिनका मुख गौ, वैल, बाघ, मिंह और गरुड़ के समान हो वे राजा होते हैं। इनका प्रताप स्थायी रहता है। ये युद्ध में चैरियों को पराजित करते हैं#॥। ७ ।