Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

49. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — वानरादिमुखलक्षण

वानरादिमुखलक्षण

वानरमहिपवराहाजतुल्यवदनाः सुतार्थसुखभाजः। गर्दभकरभप्रतिमैर्मुखैः शरीरेश्र निःस्वसुखाः ॥८॥ जिनके मुख वानर, मैंसा, शूकर और चकरे के समान हों वे पुत्रवान्, धनवान् और सुखभागा होते हैं। जिनके मुख और शरीर गधे व ऊँट के समान हों वे दुखी दरिद्र बने रहते हैं॥ ८ ॥ शरीरांगुलपमाण अष्टशतं परणवतिः परिमाएं चतुरशीतिरिति पुंसाम। उत्तमसमहीनानामंगुल संख्यास्वमानेन।। ६।। जिनका शरीर अपने अंगुल परिमार से एक सौ आठ अंगुल ऊँचा हो वे उत्तम होते हैं। जिनका शरीर छानवे अंगुल ऊँचा हो वे मध्यम होते हैं। जिनका शरीर चौरासी अंगुल ऊँचा हो वे अधम होते हैं ॥। है।। भागर्धतनुः सुखभाक् तुलितोऽतो दुःखभाग्भवत्यूनः। भारोतीवाव्यानामध्यर्द्धः सर्वधरणीशः॥१०।। जिसका शरीर तौलने में आधा भार यानी एकमन हो, वह सुखभागी होता है। जिसका शरीर तौलने में आधे भार से भी कम हो, वह दुःख- मागी होता है। जिसका शरीर तौलने में एक भार यानी दो मन हो, वह धनाठ्य होता है। जिसका शरीर तौलने में डेड भार यानी तीन मन हो, षह सारी पृथ्वी का स्वामी होता है॥ १०॥ मानवर्पप्रमाण विंशतिवर्षा नारी पुरुषः खलु पञ्चविंशतिभिरव्दैः। अर्हति मानोन्मानं जीवितभागे चतुर्थे वा ॥ ११॥ *यहाँ कहे गये पशु-पक्षियों आदि के स्वरूप का ज्ञान अत्यावश्यक है। देखिये हमारा सामुद्रक किन किन शास्त्रों से सम्बद्ध है। संपादक। पथमखएड जिस समय नारी बीस वर्ष की हो और पुरुष पचीस वर्ष का हो तो मान व उन्मान के योग्य होता है। अर्थात् उच्चना व वज़न का फल कहना चाहिये; अथवा आयु के चौथे भाग में उच्चता व वज़न को जानकर फला- देश कहे॥ ११ ॥ भूजलशिख्यनिलाम्वरसुरनररक्षःपिशाचकतिरश्चाम्। सत्वेन भवति पुरुषो लक्षणमेतद्धवत्येषाम् ॥१२॥

  • पृथ्वी, जल, अ्ग्नि, वायु, आकाश, देवता, मनुष्य, शक्षस, पिशाच और पशु इनके स्वभाव के समान स्वभाववाला पुरुप इन्हीं के लक्षणों के समान होता है॥ १२ ॥