Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

51. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — आकाशस्वभावलक्षण

आकाशस्वभावलक्षण

खप्रकृतिर्निपुणो विद्ृतास्यः शब्दगतौ कुशलः शुषिराङ्गः। त्यागयुतः पुरुषो मृदुकोपः स्नेहरतश्च भवेत्सुरसत्त्त्वः।१५।।

  • इसे समभने के पूर्व पृथ्वी. जल. अग्नि. मनुष्य, गक्षस. पिशाच आदि का स्वभाव जान लेना आवश्यक है। इसके लिए इससे संबंध रखनेवाल शास्त्र अवलोकन करना आवश्यक है। हम इसे अन्यत्र लिखेंगे। संपादक। आकाश के समान स्व्रमाववाला, चौड़े मुखवाला, निपुण तथा शब्द- शास्त्र कुशल होना है। जिसका स्व्रभाव देवता के समान हो वह दानशील, अल्पक्रोधी और म्रेमी होता है।। १५ ।।