Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

55. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — नखपादादिलक्षण

नखपादादिलक्षण

स्निग्धोन्नताग्रतनुताम्रनखौ कुमार्या: पादौ समोपचितचारुनिगूढगुल्फौ। श्लिष्टांगुली कमलकान्तितलौ च यस्या- स्तामुद्धहेद्यदि भुवोधिपतित्वमिच्छेत्॥ २ ।। जिस कुमारी के नख चिकने और ऊँचे हों, जिनका अग्रभाग पतला व तांबे के वर्ण हो, दोनों पैर समान व कुछ मोटे तथा मनोरम हो, जिनमें गंठे (टखने) छिपे हों, अंगुलियाँ परस्पर मिली हों, तलवे कमल के सदृश शोभावाले हो, ऐसी कुमारी को सुलक्षखा जानना चाहिये। यदि कोई पुरुप पृथ्वीपति होने की इच्छा करे तो ऐसी कुमारी से अपना विवाह करे ॥ २ ॥