Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

64. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — ऊ्ध्वरेखालक्षण

ऊ्ध्वरेखालक्षण

मध्यांगुलिं या मणिबन्धनोत्था रेखा गता पाणितलेऽङ्गनायाः। ऊर्ध्वस्थिता पादतलेथवा या पुंसोऽथवा राज्यसुखायसा स्यात्॥ जिसके करतल में मशिबन्ध से उठी ऊर्ध्वरेखा मध्यमा के मूल तक गई हो वह स्त्री रानी होती है। इसीभाँति पादतल में ऊर्ध्वरेखा हो तो भी रानी होती है। अपने पुरुप को राज्यसुखदात्री होती है। जिस पुरुष के करतल या पादतल में ऊर्ध्वरेखा उपस्थित होवह भी राजा होता है ॥ १३॥