Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

66. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — ग्रीवालक्षण

ग्रीवालक्षण

हस्वयातिनिःस्वता दीर्घया कुलक्षयः। ग्रीवया पृथूत्थया योपितः प्रचएडता ॥ १६ ॥ जिन त्रियों की ग्रीवा ( घींच) बहुत छोटी हो वे दरिद्रिणी होती हैं। जिनकी ग्रीता लम्बी हो वे वंश बिनाशती हैं। जिनकी ग्रीवा चौड़ी, और ऊँची हो वे क्रोधी होती हैं॥ १६ ॥ नेत्रगए डकूप ल क्ष णा नेत्रे यस्या: के करे पिङ्गले वा सा दुःशीला श्यावलोलेक्षणा च। कृपो यस्या गएडयोश्च स्मितेपु निःसंदिग्धंवञ्चकींतां वदन्ति२व जिसके दोनों नेत्र कजे हों वह दुश्चरित्रा होती है। जिसके नेत्र पिङलवर्ण हो, चश्चल चितवन हो वह भी दुश्चरित्रा होती है। जिसके हँसने के समय गालों में गड्ढे पड़ जाते हों उस ख्ी को मुनियों ने निःसंदेह वश्चकी (असती) कहा है॥ २० । प्रविलम्बिनि देवरं ललाटे श्वशुरं हन्त्युदरे स्फिजोः पति च।