Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

67. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — ललाटलक्तण

ललाटलक्तण

अतिरोम चयान्वितो त्तरोष्ठी न शुभाभर्तुरतीव या च दीर्घा ॥२१।। जिसका लज़ाट बहुत लम्बा हो, वह स्त्री देवर को विनाशती है। जिसका पेट लम्बा हो वह ससुर का नाशती है। जिसके कूले लम्बे हों वह पतिघातक होती है। जिसके मूछैं सी निकल आई हों वह स्त्री स्वामी को शुभदायक नहीं होती। जो स्त्री पति की अपेक्षा लम्बी हो वह स्वामी को अतीव दुःखदायक होती है॥ २?॥