Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

68. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — स्तनकर्णदन्तलक्षण

स्तनकर्णदन्तलक्षण

स्तनौ सरोमो मलिनोल्वणौ च केशं दधाते विषमौ च कर्णौं। स्थूला: कराला विपमाश्रदन्ताः क्केशाय चौर्याय च कृष्णमांसाः जिनके स्तन (दूध ) रोमीं समेत मैले और बड़े हों, नान विषम (ळ्ोटे- बड़े) हों तो उन्हें क्लेशकारक होते हैं। जिनके दाँत मोटे, कराल तथा विषम हों तो दुःखदायक होते हैं। जिनके मसूदों के मांस काले हों वे त्रियाँ चोरी करती हैं॥ २२॥ करतल में क्रच्यादिरेख़ाज्ञान क्रव्याद रूपैर्वृकका ककङ्कसरीसृपोलकसमानचिह्ैः । शुष्कैः शिरालेविषमैश्र हस्तैर्भवन्ति नार्यः सुखवित्तहीना: २३ जिनके हाथों में मांसमनी चाज आदि पत्ी, भेड़िया, कौचा, ऊजली, चील और तुम्बू के समान निशान हो, जिनके होथ सूखी नसों से व्याप हों, जिनके हाथ विपम हों तो वे स्ति्रियाँ सुख व धन से रहित रहती हैं ।२३।