72. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — गमन में कनिष्ठिकादिलक्षण
गमन में कनिष्ठिकादिलक्षण
यस्या: कनिष्ठिका भूमं न गच्छन्त्याः परिस्पृशेत् ॥१६॥ सा निहत्य पति योपा द्वितीयं कुरुते पतिम्। अनामिका च मध्या च यस्या भूमि न हि स्पृशेत् ॥२०॥ पतिद्वयं निहन्त्याद्या द्वितीया च पतित्रयम्। पतिहीनत्वकारिएयो हीने ते दे इमे यदि॥ २१॥ चलने में जिस स्त्री की कनिष्टिका अंगुली भूमि को न स्पर्श करे वह एक पति को मारकर दूमरा पति करती है। जिसकी अनामिका अंगुली भूमि का स्पर्श न करे वह स्त्री दो पतियों को मारती है। जिस की मध्यमा अंगुला भूमि को नहीं छूना वह स्त्री तीन पतियों को मारती है और यदि अनामिका व मध्यमा ये दोनों अंगुलियाँ न हों तो वह पति को बिनाश्ती है॥१६।२१।