75. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — गुल्फादिलक्षण
गुल्फादिलक्षण
गूढौ गुल्फौ शिवायोक्कावशिरालौ सुवर्तुलौ। स्थपुटौ शिथिलौ दृश्यौ स्यातां दौर्भाग्यसूचकौ ॥२६॥ समपाष्णि: शुभा नारी पृथुपार्ष्णिश्च दुर्भगा। कुलटोन्नतपार्षिणः स्याद्दीर्घपाष्पिश्च दुःखभाकू॥ २७॥ नसों से व्याप्त, छिपे हुए, गोलाकार पैर के गंठे कल्याणदायक होते हैं। पैर के गंठे निचले ढीले से हों तो बुरे भाग को बतलाते हैं। जिसके पैर की एड़ो सम हो वह स्त्री शुभरायक होती है। जिसकी एड़ी चौढ़ी हो वह दुर्भगा होती है। जिसकी पड़ी ऊँची हो वह छिनाल होती है। जिसकी एड़ी लम्बी हो वह दुःखभागिनी होती है॥ २६।२७।।