79. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — चस्तिलक्षण
चस्तिलक्षण
बस्तिः प्रशस्ता विपुला मृद्धी स्तोकसमुन्नता। रोमशा च शिराला च रेखाङ्का नैव शोभना।। ४४ ॥ जिसकी पेड़ू विशाल, कोमल, और कुछ ऊँची हो तो शुमदायक होती है। जो पेड़ू रोमों व नसों से व्याप्त रेखाओं से अंकित हो वह शुभदायक नहीं होती॥ ४४ ॥