81. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — कुतिलक्षण
कुतिलक्षण
उन्नतेन बलीभाजा सावर्तेनापि कुचिणा। बन्ध्या प्रत्जिता दासी क्रमाद्योषा भवेदिह ॥। ४७॥। जिसकी कोख आवर्त समेत ऊँची हो बह खरी बाँफ होती है। जिसकी कोख ढीली खालवाली हो वह संन्यासिनी होती है। जिसकी काख आवर्त समेत मतीत हो वह दासी होती है।। ४७।।