Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

82. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — पार्श्वलक्षण

पार्श्वलक्षण

समैः समांशैर्षृदुभिर्योषिन्मग्नास्थिमि: शुभैः। पार्श्वैः सौभाग्यसुखयोनिधानं स्यादसंशयम्॥४८।। यस्या दृश्यशिरे पार्श्वें उन्नते रोमसंयुते। निरपत्या च दुश्शीला सा भवेद्दुःखशेवधिः॥४६॥ जिनकी पसलियाँ समान, मांस-समेत, कोमल, शुमदायक, छिपी इट्टियों- वाली हों वे स्रियाँ निःसन्देह सौभाग्यशाली होती हैं। जिसके दोनों पार्श्व नसों- वाले ऊँचे रोमसंयुक हों वह सन्तानरहित व वुरेस्वभाववाली होती है।।४८-४६॥