Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

83. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — उदरलक्षण

उदरलक्षण

उदरेणातितुच्छेन विशिरेण मृदुत्वचा। योषिद्धवति भोगाढया नित्यं मिष्टान्नसेविनी॥५० ॥ कुम्भाकारं दरिद्राया जठरं च मृदश्वत्। कूष्माएडाभं यवाभं च दुष्पूरं जायते ख्रियाः॥ ५१ ॥ जिसका पेट बडुत छोटा, नसहीन और कोमल त्वचावालां हो वह स्त्री मोगयुक़ होकर हमेशा मीठे अन् सेवन करती है। जिसका पेट घड़े के आकारवाला हो वह दरिद्रिी होती है! जिसका पेट मृदंग के समान, कुम्हड़े वा यवों के आकार का हो तो उसका वह पेट बड़े दुःखों से मरता है॥ ५०-५१ ॥