Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

84. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — विशाल जठरादिलक्षण

विशाल जठरादिलक्षण

सुविशालोदरा नारी निरपत्या च दुर्भगा। पलम्बजठरा हन्तिश्वशुरं चापि देवरम्॥५२॥ पथमखएड मध्यच्ामा च सुभगा भोगाढया सवलित्रया। ऋज्वी तन्वी च रोमाली यस्या: सा शर्मनर्मभू:॥५३॥ जिसका पेट बहुत चौढ़ा हो वह सी सन्तानरहित तथा चुरे भाग्यवाली होती है। जिसका पेट लम्बा हो वह ससुर व देवर को नाशती है। जो कृशोदरी हो वह बड़े भाग्यवाली होती है। जिसका पेट तीन बलियों से युक्क हो वह मोगवाली होती है। जिसके रोमों की पंक्ि सीधी पतली-सी हो वह सुख व क्रीड़ा की भूमि है॥ ५२-५३ ॥