Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

88. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — अंसलक्षण

अंसलक्षण

निगूढसन्धी स्स्ताग्रौ शुभावंसौ सुमंहतौ। वैधव्यदौ समुच्चाग्रौ निर्मासावतिदुःखदौ ॥ ६५ ॥ छिपे सन्धिवाले, अग्रभाग में झुके मजबून पुट्ठे शुभदायक होते हैं। यदि पुट्टे अग्रभाग में ऊँचे या निर्मास हों तो वे वैधव्यदायक तथा अत्यन्त दुःख- दायक होते हैं॥ ६५ ॥