Books / Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla)

93. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — ग्रीवालक्षण

ग्रीवालक्षण

शस्ता ग्रीवा त्रिरेखाङ्का त्वव्यक्रास्थि सुसंहता। निर्मांसा चिपिटा दीर्घा स्थपुटा न शुभप्रदा ।। ८६ ।। स्थूलग्रीवा च विधवा वक्रग्रीवा च किंकरी। बन्ध्या हि चिपिटग्रीवा इस्वग्रीवा च निःसुता।।६०।। ग्रीवा (घींच) तीन रेखाओं से अड्कित व अमकटित हड्डीवाली, अत्यन्त पुष्ट हो तो उसे शुभ कहना। ग्रीवा मांसरहित, चपटी, लब्बी, या गहरी हो तो शुभदायक नहीं है। ग्रीवा मोटीसी हो वह स्त्री विधवा होती है। जिसकी ग्रीवा टेही हो वह दासी होती है। जिसकी ग्रीवा चपटी हो वह चाँफ होती है। जिसकी ग्रीवा छोटी हो वह संतानरहित होती है।। ८६-६० ॥