95. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — कपोललक्षण
कपोललक्षण
शस्तौ कपोलौ वामाच्याः पीनौ वृत्तौ समुन्नतौ। रोमशौ परुषौ निम्नौ निर्मांसौ परिवर्जयेत्॥ ६३ ॥ मोटे, गोल, ऊँचे, गाल स्त्री के लिए शुमदायक हैं। जिसके गाल रोम- वाले, कठोर, निचले या मांसरहित हों उसे त्याग दे॥। ६३॥ पथमखएड पूह