96. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — मुखलक्षण
मुखलक्षण
समं समांसं सुस्निग्धं स्वामोदं वर्तुलं मुखम्। जनेतृवदनच्छायं धन्यानामिह जायते ॥६४ । जिनका मुख सम, समांस, चिकना, गोल, या सुगन्धित हो और जिसमें पितृमुख की शोभा हो वे स्त्रियाँ इस लोक में धन्यवाद देने योग्य होती हैं॥ ६४॥