97. Sāmudrika Śāstra — Parts 1 & 2 (Śukla) — अधरलक्षण
अधरलक्षण
पाटलो वर्तुलः स्निग्धो लेखाभूषितमध्यभूः। सीमन्तिनीनामधरो धराजानिप्रियो भवेत्॥ ६५ ॥ कृशः प्रलम्बः स्कुटितो रूक्षो दौर्भाग्यसूचकः । श्याव: स्थूलोधरोष्ठः स्याद्वैघव्यकलहप्रदः ॥ ६६ ॥ जिनका अधर (निचला ओठ) रक्तवर्ण, गोल, चिकना हो, और उसके बीच में रेखा हो, वे स्त्रियाँ रानी होती हैं। अगर अधर पतला, लम्वा, फूटा या रुखासा हो तो दौर्भाग्य सूचित करता है। कपिल वर्ण या मोटा अधर स्रिरियों को वैधव्य या लढ़ाई देता है॥ ६५-६६॥